Thursday, August 20, 2015

और यूँ ही जुड़ने लगे हम!

मुबारख हो!! एक प्यारी सी बेटी हुई है!

खुशियां कुछ इस तरह उमड़ी,
चेहरे पे उल्लास,
होंठो पे हँसी,
आँखों में नमी!
और यूँ ही जुड़ने लगे हम!

अपने हाथों से झूला बना,
लिया गोद में जब तुझे,
खूब सारा प्यार दिया, और बहुत बातें की.…
कुछ वादे मैंने किये, कुछ कसमें तूने खाई,
तू किलकारियों से रोई, मैं तन्हाइयों में,
और यूँ ही जुड़ने लगे हम!

तेरा आँखों से वो बातें करना,
मासुमियत से देख़, हौले से पैर मारना,
गुस्सा करना,
फिर अचानक से हंस देना,
अपने आप से रूबरू कराना और कहीं खो जाना,
फिर नन्हे हाथों से पकड़ मुझे दुनिया से दूर ले जाना…
और यूँ ही जुड़ने लगे हम!

फिर एक दिन ऐसा आया,
तूने नन्हा कदम उठाया,
गिरते संभलते, गिरते उठते,
हस्ते गाते आगे बढ़ी, और चलने लगी,
लो! अब बेटी बड़ी हो गयी.… 
पहली बार मन में मेरे एक डर जगाया,
एक दिन छोढ़ पीछे मुझे, आगे निकल जायेगी,
बेटी तू कितना याद आयेगी… 
डर ये करीब लाया मुझे,
और यूँ ही जुड़ने लगे हम!

टिका टिका टिका टिका टिका बोल,
शैतानियाँ करना, घर फैलाना,
इधर उधर भाग,
कहीं छिप जाना,
अपने बचपन से मुझे मिलवाना,
और यूँ ही जुड़ने लगे हम!

हौले से फिर एक आवाज़ आई,
पापा बोल मुझे, एक एहसास दिलाया,
जो सुनना चाहों दूबारा,
तो इंतज़ार कराया,
फिर चुपके से गालों पे मेरे,
प्यार कर इतराना तेरा…
और यूँ ही जुड़ने लगे हम!
 
फिर वो पड़ाव आया,
ऑफिस जाते देख मुझे,
तू रूठने, रोने लगी है,
बेटी तू कितना समझने लगी है?
ऑफिस में फ़ोन पे घंटी बजी जब,
आवाज़ सुना अपनी,
प्यारा सा एक सपना पूरा किया तूने,
स्पर्श किया मन को मेरे.... 
और यूँ ही जुड़ने लगे हम!
 
तू आइना है मेरा,
अपने आप को तुझमे देखता हूँ,
तेरी दुनिया में अपना बचपन जीता मरता हूँ,
जब तेरे साथ होता हूँ, 
बस तेरे साथ होता हूँ.… 
और यूँ ही जुड़ने लगे हम!
 
तुझको लेकर,
तुझको लेकर, तेरी मम्मी से एक दौड़ लगाता हूँ,
आन्या किसका बेटा है? ये प्रशन दुहराता हूँ,
और हार जाता हूँ!
हार कर भी जीत हुई है मेरी,
उपहार में पाकर तुझको तेरी मम्मी से,
बदल गया है जीवन मेरा,
बदल गयी है दुनिया हमारी,
और यूँ ही जुड़ने लगे हम!

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